#ईश्वर : कौन है ?और कहां मिलेंगे?

यह कविता मेरे द्वारा रचित प्रथम कविता है। इस कविता को रचने से संबंधित एक घटना मुझे याद है ।

हमारे हमारे कॉलेज में एक  प्रतियोगिता थी। जिसमें हमें अलग-अलग विषय पर कविताएं पढ़नी थी और शर्त यह थी कि वह कविता हमारे द्वारा रचित हो । तो आनन-फानन में मैंने यह कविता रची और मुझको इसमें प्रथम श्रेणी में रखा गया और मुझे प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। 

मैं आपके साथ में इस कविता के अल्फाज शेयर करना चाहती हूं यह कविता ईश्वर के अस्तित्व को बताती है तो कविता कुछ इस प्रकार है-


एक ऐसी शक्ति जो संचालित करती है, जीवन को हमारे।

उस शक्ति का नाम है ईश्वर।।


कुछ लोग कहते हैं कि; मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे

और गिरजाघरों में रहता है यह ईश्वर।

नासमझ है यह सारे न समझ पाए, उसकी सत्ता को।

कि सच्चे  लोगों की 'दुआओं' और 'दिलो' में बसता है यह ईश्वर।


देखना है तो देखो किसी की "प्रार्थना" में कहीं,

अपने बच्चों की दुआओं को सुनने वही बैठता है यह ईश्वर।।


जब कोई साथ नहीं होता, तब साथ होता है यह ईश्वर।

बुरे वक्त में भी संभल पाने का ज्ञान, हमें देता है ईश्वर।।


अपने बच्चों के आंसू देख पिघलता है ईश्वर।

मासूम बच्चों की खिलखिलाहटों को नूर देता है ईश्वर।।


सच्चे लोगों की मुस्कुराहटों में अपनी झलक देता है ईश्वर।


और क्या पता बताऊं उसका, तर्क वितर्क से ऊपर है यह ईश्वर।।


ऐसा नहीं कि वह दिखाई नहीं दे सकता हमें।

हम पूर्णतः सच्चे हो, तो हमारे लिए प्रत्यक्ष भी होता है वह ईश्वर।। 



यदि आपको यह कविता सत्य लगी हो अच्छी लगी हो तो कृपया अपनी टिप्पणी भी दर्ज करवाएं,

 और नीचे दिए गए लिंक में क्लिक करने पर आप इस कविता को यूट्यूब पर भी सुन सकते हैं-


https://youtu.be/OXD1MuF-qF8



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