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मई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

घरेलू औषधीय पौधे : घर पर अवश्य लगाएं

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  ऐसी कई घरेलू औषधियां है जिन्हें हम सामान्य वनस्पति समझ कर उनकी ओर ज्यादा ध्यान नहीं देते जबकि छोटे-बड़े रोगों से निपटने हेतु यही औषधियां बहुत कारगर होती हैं, क्योंकि इनका कोई विपरीत प्रभाव भी नहीं होता है और इनके नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। प्रमुख घरेलू औषधियां तुलसी घृतकुमारी सेम धनिया पुदीना ब्राह्मी गेंदा गुड़हल इत्यादि वनस्पतियां हम सामान्य जीवन में यूं ही देखते रहते हैं किंतु यह बहुत ही उपयोगी घरेलू औषधियां हैं जिनके उपयोग से कई रोगों से ग्रसित व्यक्तियों के जीवन में सुधार हो सकता है। प्रमुख घरेलू औषधियों के फायदे व प्रभाव कुछ प्रमुख घरेलू औषधियों के फायदे वह प्रभाव के बारे में विवरण निम्न प्रकार दिया गया है:- तुलसी: विद्यार्थियों को सुबह के समय हल्के गुनगुने पानी के साथ तुलसी के पत्तों को लेना चाहिए। इससे विद्यार्थियों की याददाश्त क्षमता में वृद्धि होती है तथा उनको ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। खांसी जुखाम की समस्या में  तुलसी असरदार होती है। गिलोय: गिलोय को शास्त्रों में अथवा प्राचीन चिकित्सा संबंधी ग्रंथों में अमृतवेल कहा गया है य...

घर पर ही करें बीजों का प्रबंध और करें बागवानी

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 आपके मन में बागवानी करने की इच्छा तो प्रबल है; पर आप जब बागवानी शुरू करने का सोचेंगे, तो सबसे पहले बीज के प्रबंधन के विषय में चिंतन करेंगे। जमीन के विषय में चिंतन करेंगे।  घर में बागवानी करने के लिए बहुत सारी जमीन की जरूरत नहीं है। आप गमलों में घरों की छतों में ही आप पौधों को लगाकर के बागवानी कर सकते हैं और रही बात बीजों के प्रबंध की तो बाजार में यूं ही सिर्फ  बीज खरीदने जाना कोरोना महामारी के चलते आपको उचित न लगे।  इस समस्या का समाधान भी है हमारे घरों में हम खाने की बहुत सारी सब्जियों फलों का उपभोग कर रहे हैं। इनके मुख्य भाग का उपभोग कर हम अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं तथा फलों व सब्जियों के बीजों को फेंकने के बजाय मिट्टी में दबा कर हम नए पौधों को उनसे उगा सकते हैं और इसके पश्चात फल व सब्जियां प्राप्त कर सकते हैं।  खाना बनाते वक्त सब्जियों के बीजों को फेंके नहीं जैसे कि टमाटर आदि सब्जियों तथा फल पपीता आदि। इन्हें काट करके इनके बीजों को अलग कर दें। यह भी सीधे मिट्टी में डाल दें।  बस इतना ही करना होता है। बाकी काम धरती मां कर देती हैं।मैंने टमाटर के बीजों...

#ईश्वर : कौन है ?और कहां मिलेंगे?

यह कविता मेरे द्वारा रचित प्रथम कविता है। इस कविता को रचने से संबंधित एक घटना मुझे याद है । हमारे हमारे कॉलेज में एक  प्रतियोगिता थी। जिसमें हमें अलग-अलग विषय पर कविताएं पढ़नी थी और शर्त यह थी कि वह कविता हमारे द्वारा रचित हो । तो आनन-फानन में मैंने यह कविता रची और मुझको इसमें प्रथम श्रेणी में रखा गया और मुझे प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ।  मैं आपके साथ में इस कविता के अल्फाज शेयर करना चाहती हूं यह कविता ईश्वर के अस्तित्व को बताती है तो कविता कुछ इस प्रकार है- एक ऐसी शक्ति जो संचालित करती है, जीवन को हमारे। उस शक्ति का नाम है ईश्वर।। कुछ लोग कहते हैं कि; मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और गिरजाघरों में रहता है यह ईश्वर। नासमझ है यह सारे न समझ पाए, उसकी सत्ता को। कि सच्चे  लोगों की 'दुआओं' और 'दिलो' में बसता है यह ईश्वर। देखना है तो देखो किसी की "प्रार्थना" में कहीं, अपने बच्चों की दुआओं को सुनने वही बैठता है यह ईश्वर।। जब कोई साथ नहीं होता, तब साथ होता है यह ईश्वर। बुरे वक्त में भी संभल पाने का ज्ञान, हमें देता है ईश्वर।। अपने बच्चों के आंसू देख पिघलता है ईश्वर। मासूम ...

# प्रेरणादायी कविता : दुआओं का पन्ना

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कोई बच्चा अपनी मां से बहुत दूर चला जाए और उस पर कष्ट आ जाए तो जिस प्रकार मां की दुआएं उस बच्चे को सारे कष्टों  और बुरे सायों को दूर कर उसे आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है। उसी प्रकार इस कविता में किताब से उसका एक पन्ना अलग हो जाता है और विषम परिस्थितियों में भी जिंदा रहने की वजह  वह जिस किताब  से जुड़ा था उस किताब के द्वारा उसे दी गई दुआओं को मानता है ,और अपने शब्दों को यू अल्फाज देता है ... शायद मैं तुम्हारी ही दुआओं का पन्ना हूं । ना जाने कैसे फट गया; और तुमसे दूर होकर ,तुमसे ही कट गया।   तूफानों के बहाव में बहा और जहां तूफान ने छोड़ा वहीं सिमट गया।।  तेरे साथ था तो खिलखिलाता  था। पर वक्त के थपेड़ों से मैं अब कराहकर फड़फड़ाता था ।। जब तेरे पास था तो दुनिया की बुराई का एहसास ना डराता था । आज जब अलग हुआ तो, संघर्ष का घर्षण मुझे जलाता था।  था तो मैं आखिर पन्ना, खुद पर लगी आग कैसे बुझा पाता।  ऐसा संघर्ष पहली बार देखा था , परिस्थितियों से  तालमेल कैसे बिठा पाता ।  पर तू भी मेरी दुआओं से भरी किताब थी।  मुझे मेरे हाल पर कैसे छोड़ सकती ...

#प्रेरणादायी सुविचार: कोरोना वॉलिंटियर्स

  मैंने अपने मस्तिष्क में कोरोना विरोधी और  देश के लिए इस कठिन समय में काम कर रहे  वॉलिंटियर्स  (डॉक्टर्स , सिपाही पुलिस , सफाई वाला  , मेडिकल वाला  और  वह सब इंसान जो दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे हैं  वह सब वॉलिंटियर्स शब्द मैं समाहित है। ) से संबंधित आ रही लयबद्ध पंक्तियों को शब्दों में उतारने का कोशिश की है यदि आपको यह पंक्तियां पसंद आए तो इसको अपने नीचे कमेंट में बताइएगा और इसको और अधिक से अधिक शेयर कीजिएगा ।                        # शायरी :   दिमाग की बात दिल से  दुनिया में तुम बहुत हो, हम बहुत हैं ।                            लेकिन अलग और बेहतर वही , जिसमें इंसानियत बहुत है।। अपनी जान देकर के पल-पल देश को बचाया है ,             कोरोना तुझे मेरे देश के जवानों ने पल-पल हराया है  ।             तू नहीं टिकेगा यह तेरी भी समझ में ...

#प्रेरणादायी कविता : कर्म योग

 कविता में शब्दों के चमत्कृत प्रयोग द्वारा किसी व्यक्ति के उर्जा में बढ़ोतरी की जा सकती है।किसी मरणासन्न व्यक्ति में भी प्राण फुके जा सकते हैं।  भारत में कई महान कवि हुए हैं जिनकी कविता आज भी हमारे लिए प्रेरणा का विषय है मैंने भी अपनी स्वरचित कविता को कुछ प्रेरणादाई शब्द देने की कोशिश की है प्रयास किया है इस कविता का शीर्षक है कर्मयोग।                                 कर्म योग जिंदा रहने की जिद थी मेरी , तो मौत को भी मेरे आगे झुकना पड़ा।  पर इस जिद  में अड़े रहने के लिए,  मुझे बहुत कुछ खोना पड़ा ।। मेरे दुश्मन चारों ओर से घेरे खड़े थे , बाहर ही नहीं मेरे अंदर भी उनके किले गढे़ थे ।। पर मैंने भी हार न मानी , जंग जीतने की मैंने ठानी । आखिरकार जंग जीत रहा था मैं , भाग्य को कर्म से बदलना सीख रहा था मैं।।

#प्रेरणादायक कहानी: सोच

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 हम कभी-कभी अपनी सोच और अपने ही अहंकार के वशीभूत होकर अपनी ही सोच को दूसरे पर लागू कर देते हैं जबकि दूसरे की परिस्थिति कभी-कभी विपरीत भी हो सकती हैं अतः हमें एक संवेदनशील व्यक्ति की तरह सोचना चाहिए और सोच को सकारात्मक रखना चाहिए जो कि अपने और दूसरों के हित में हो । इस कहानी में रितेश और रमेश दो किरदार हैं एक अपने दिमाग में दूसरे के प्रति नफरत को भर देता है जबकि दूसरा अपनी जिंदगी को बनाने के लिए सब कुछ छोड़ कर के केंद्रित होकर अपने ही मकसद को पूरा करने पर लगा रहता है क्योंकि वह सही निष्ठा के साथ मैं अपने कर्तव्य के प्रति वफादार है आगे की कहानी जानने के लिए आपको इस कहानी को पूरा पढ़ना होगा इसीलिए  कृपया आगे की कहानी ध्यान से  भावात्मकता के साथ में पढ़िए गा।               सोच   रितेश ने जब आईना मैं अपने आपको देखा तो उसके मन से उसे आवाज आई "तुतलाना मेरी समस्या है और मैं हार नहीं मान सकता" ,‌ और  वह इसका हल निकालने की युक्ति सोचने लगा ।  अगले दिन वह स्कूल के लिए निकल रहा था कि अचानक उसकी नजर मेंज पर पड़े अखबार पर पड़ी उसमें डॉक...

#चांद पत्थर : देहरादून का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

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      देहरादून - ऋषिकेश मार्ग के बीच में एक अत्यंत सुंदर गांव भोगपुर पड़ता है । चांद पत्थर जाने के लिए, भोगपुर से इठारना  रोड के रास्ते पर सबसे पहला पड़ाव लाल बंगला आता है।  लाल बंगले से आगे की तरफ बढ़ने पर अंग्रेजों द्वारा बनाई गई नहर दिखाई पड़ती है और उस नहर के आग ही साथ साथ चलते रहने पर कुछ दूरी पर चांद पत्थर नामक जगह हमें मिलती है जहां चांद पत्थर के दर्शन होते हैं।  यदिआप उत्तराखंड के निवासी हो अथवा विदेशी हों औरआप उत्तराखंड भ्रमण करते हुए देहरादून में उपस्थित हैं तो आपको अवश्य ही चांद पत्थर को देखने आना चाहिए यह बहुत ही रोचक जगह है। यह देखना आपके लिए बहुत ही रोमांच भरा होगा।  इस जगह पर सेल्फी प्वाइंट भी निर्मित है जहां पर मुख्यत: पर्यटक बैठकर शांत वातावरण को महसूस करते हैं एवं अपनी तस्वीर खींचकर जगह की यादों को तस्वीर में कैद कर लेते हैं ।  यह देहरादून का रमणीय स्थल है किंतु लोगों में ज्यादा जानकारी ना होने पाने के कारण यह  राष्ट्रीय स्तर अथवा विश्व स्तर पर पर इतनी ख्याति प्राप्त नहीं कर पाया है। किंतु ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा यहां...

#लाल बंगला : भोगपुर

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  भोगपुर उत्तराखण्ड के ऋषिकेश - देहरादून‌ मार्ग के बीच में पडने‌ वाला एक प्राकृतिक‌ खूबसूरती से भरा गांव है।भोगपुर गांव अंग्रेजों के जमाने से पहले का है।       जब अंग्रेज (ब्रिटिश) भारत आए थे तब उन्होनें यहां प्रसाशनिक अधिकारियों के रहने के लिए एक बंगला का निर्माण किया था। जिसे स्थानीय निवासी लाल  बंगला  के नाम से जानते हैं । यह बंगला आज भी अपनी सुंदरता और भव्यता लिए हुए हैं आज भी यहां प्रशासनिक अधिकारी आते हैं ठहराव करते हैं इस बंगले के अंदर पुराने समय के बर्तन व फर्नीचर आज भी मौजूद हैं जो अंग्रेजों के जमाने की याद दिलाता है।  यहां सामान्य जन घूमने के लिए जा सकते हैं किंतु बंगले के अंदर जाने हेतु विशेष अनुमति बंगले की देखरेख कर रहे कर्मचारी ही प्रदान कर सकते हैं। यहां चारों और प्राकृतिक छटा बिखरी हुई रहती है । https://youtu.be/RABR08A9QlE  

# फोटोग्राफी

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प्रकृति में बहुत ही सुंदर रमणीय दृश्य पाए जाते हैं। इन दृश्यों को अपने कैमरे द्वारा अथवा चित्रकारी द्वारा एक कैनवास में कैद कर लेना आसान नहीं होता । कुछ व्यक्ति विशेष ऐसे चित्रों का ऐसे सुंदर चित्रण करते हैं की सत्यता और भ्रम में जल्दी से अंतर  नहीं हो पाता।  आप नीचे दिए गए चित्र को ध्यान पूर्वक देखिए और इसके बाद दिए गए विकल्पों में से एक का चयन कीजिए। नंबर 1 : यह चित्र वास्तविक नहीं है अपितु यह चित्रकार द्वारा बनाया गया हैै। नंबर 2 : यह चित्र वास्तविक है  तथा प्राकृतिक  है। जिसमें दिख रहे सब चीजें सत्य हैं। नंबर 3 : जिसमें  पहाड़ आभासी प्रतिबिंब हैं।  नंबर 4 :चित्र मैं वास्तविक पहाड़ मौजूद हैं और कोई विशेष बात नहीं है। आप अपने उत्तर की  अवश्य ही टिप्पणी कीजिए कि आपने कौन सा उत्तर चुना और वाकई में सर्वप्रथम आपने जब इस चित्र को देखा तो कौन सा जवाब आपको सही लगा।  इसका सही जवाब यह है नंबर 3: यह चित्र आभासी प्रतिबिंब है  और अब अपने फोन को उल्टा करके देखिए आपको एहसास हो जाएगा कि यह जो पहाड़ है वह पहाड़ों की पानी में परछाई है । यह एक प्रतिकृति है औ...

#GARDENING

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    # बागवानी                                                                                                 कोरोना महामारी के इस काल में जो लोग घरों में बैठकर के भयभीत हो रहे हैं और बिना वायरस के ही भय ग्रस्त होकर के अवसाद से ग्रसित हो रहे हैं उनके लिए यह संदेश है की आप कोरोना से भय मत करो बल्कि आप घर में अपनों के साथ अच्छे समय को व्यतीत करें सावधानी को बरतें और अपने अंदर छुपे हुए जो टैलेंट है उसको बाहर लेकर के आए । आप बहुत से काम घर में होकर कर सकते हैं। मैंने बहुत समय सब टीवी के आगे बैठ करके अपना समय बर्बाद किया किंतु मैंने कुछ समय पहले नई शुरुआत गार्डनिंग से की अर्थात बागवानी से। मेरे घर में थोड़ी सी जमीन बची हुई थी और उस जमीन में मैंने काम करना शुरू किया शुरुआत में मेहनत ज्यादा लगी लेकिन जब मैंने बीज डाला और कुछ ही दिनों म...