#प्रेरणादायी कविता : कर्म योग
कविता में शब्दों के चमत्कृत प्रयोग द्वारा किसी व्यक्ति के उर्जा में बढ़ोतरी की जा सकती है।किसी मरणासन्न व्यक्ति में भी प्राण फुके जा सकते हैं।
भारत में कई महान कवि हुए हैं जिनकी कविता आज भी हमारे लिए प्रेरणा का विषय है मैंने भी अपनी स्वरचित कविता को कुछ प्रेरणादाई शब्द देने की कोशिश की है प्रयास किया है इस कविता का शीर्षक है कर्मयोग।
कर्म योग
जिंदा रहने की जिद थी मेरी ,
तो मौत को भी मेरे आगे झुकना पड़ा।
पर इस जिद में अड़े रहने के लिए,
मुझे बहुत कुछ खोना पड़ा ।।
मेरे दुश्मन चारों ओर से घेरे खड़े थे ,
बाहर ही नहीं मेरे अंदर भी उनके किले गढे़ थे ।।
पर मैंने भी हार न मानी ,
जंग जीतने की मैंने ठानी ।
आखिरकार जंग जीत रहा था मैं ,
भाग्य को कर्म से बदलना सीख रहा था मैं।।
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