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2022 : वर्तमान भारत के राज्य व केंद्र शासित प्रदेश

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वर्तमान समय में भारत के राजनीतिक क्षेत्र विभाजन के संदर्भ में बहुत से महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए। जैसे कि 2 जून 2014 को पहले तेलंगाना, आंध्र प्रदेश से अलग होकर एक नए राज्य के रूप में स्थापित हुआ।     फिर कुछ ही समय पहले 2019 में एक नया इतिहास रचते हुए जम्मू कश्मीर के हिस्से को  लद्दाख  और  जम्मू   कश्मीर में विभक्त कर इसे नए केंद्र शासित प्रदेश (UT) का नाम दिया गया। इसके अतिरिक्त दादर नगर हवेली तथा दमन दीव को एकजुट कर एक ही केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया।      इन बेहतरीन नए बदलावों के साथ भारत के नक्शे में भी कुछ बदलाव नजर आए। इस प्रकार वर्तमान में भारत के 28 राज्य व 8 केंद्र शासित प्रदेशों की सूची निम्न प्रकार है:- 8 केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, जम्मू कश्मीर, चंडीगढ़, दिल्ली, दादर एवं नागर हवेली तथा दमन एंड दिउ अंडमान एंड निकोबार दीप समूह, पुदुचेरी लक्ष्यदीप अगस्त 2019 में, भारत की संसद में जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 पारित किया। जिसके द्वारा एक कि 31 अक्टूबर 2019 को लद्दाख और जम्मू कश्मीर  केंद्र शासित प्रदेश बन गए। प्रश...

घरेलू औषधीय पौधे : घर पर अवश्य लगाएं

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  ऐसी कई घरेलू औषधियां है जिन्हें हम सामान्य वनस्पति समझ कर उनकी ओर ज्यादा ध्यान नहीं देते जबकि छोटे-बड़े रोगों से निपटने हेतु यही औषधियां बहुत कारगर होती हैं, क्योंकि इनका कोई विपरीत प्रभाव भी नहीं होता है और इनके नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। प्रमुख घरेलू औषधियां तुलसी घृतकुमारी सेम धनिया पुदीना ब्राह्मी गेंदा गुड़हल इत्यादि वनस्पतियां हम सामान्य जीवन में यूं ही देखते रहते हैं किंतु यह बहुत ही उपयोगी घरेलू औषधियां हैं जिनके उपयोग से कई रोगों से ग्रसित व्यक्तियों के जीवन में सुधार हो सकता है। प्रमुख घरेलू औषधियों के फायदे व प्रभाव कुछ प्रमुख घरेलू औषधियों के फायदे वह प्रभाव के बारे में विवरण निम्न प्रकार दिया गया है:- तुलसी: विद्यार्थियों को सुबह के समय हल्के गुनगुने पानी के साथ तुलसी के पत्तों को लेना चाहिए। इससे विद्यार्थियों की याददाश्त क्षमता में वृद्धि होती है तथा उनको ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। खांसी जुखाम की समस्या में  तुलसी असरदार होती है। गिलोय: गिलोय को शास्त्रों में अथवा प्राचीन चिकित्सा संबंधी ग्रंथों में अमृतवेल कहा गया है य...

घर पर ही करें बीजों का प्रबंध और करें बागवानी

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 आपके मन में बागवानी करने की इच्छा तो प्रबल है; पर आप जब बागवानी शुरू करने का सोचेंगे, तो सबसे पहले बीज के प्रबंधन के विषय में चिंतन करेंगे। जमीन के विषय में चिंतन करेंगे।  घर में बागवानी करने के लिए बहुत सारी जमीन की जरूरत नहीं है। आप गमलों में घरों की छतों में ही आप पौधों को लगाकर के बागवानी कर सकते हैं और रही बात बीजों के प्रबंध की तो बाजार में यूं ही सिर्फ  बीज खरीदने जाना कोरोना महामारी के चलते आपको उचित न लगे।  इस समस्या का समाधान भी है हमारे घरों में हम खाने की बहुत सारी सब्जियों फलों का उपभोग कर रहे हैं। इनके मुख्य भाग का उपभोग कर हम अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं तथा फलों व सब्जियों के बीजों को फेंकने के बजाय मिट्टी में दबा कर हम नए पौधों को उनसे उगा सकते हैं और इसके पश्चात फल व सब्जियां प्राप्त कर सकते हैं।  खाना बनाते वक्त सब्जियों के बीजों को फेंके नहीं जैसे कि टमाटर आदि सब्जियों तथा फल पपीता आदि। इन्हें काट करके इनके बीजों को अलग कर दें। यह भी सीधे मिट्टी में डाल दें।  बस इतना ही करना होता है। बाकी काम धरती मां कर देती हैं।मैंने टमाटर के बीजों...

#ईश्वर : कौन है ?और कहां मिलेंगे?

यह कविता मेरे द्वारा रचित प्रथम कविता है। इस कविता को रचने से संबंधित एक घटना मुझे याद है । हमारे हमारे कॉलेज में एक  प्रतियोगिता थी। जिसमें हमें अलग-अलग विषय पर कविताएं पढ़नी थी और शर्त यह थी कि वह कविता हमारे द्वारा रचित हो । तो आनन-फानन में मैंने यह कविता रची और मुझको इसमें प्रथम श्रेणी में रखा गया और मुझे प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ।  मैं आपके साथ में इस कविता के अल्फाज शेयर करना चाहती हूं यह कविता ईश्वर के अस्तित्व को बताती है तो कविता कुछ इस प्रकार है- एक ऐसी शक्ति जो संचालित करती है, जीवन को हमारे। उस शक्ति का नाम है ईश्वर।। कुछ लोग कहते हैं कि; मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और गिरजाघरों में रहता है यह ईश्वर। नासमझ है यह सारे न समझ पाए, उसकी सत्ता को। कि सच्चे  लोगों की 'दुआओं' और 'दिलो' में बसता है यह ईश्वर। देखना है तो देखो किसी की "प्रार्थना" में कहीं, अपने बच्चों की दुआओं को सुनने वही बैठता है यह ईश्वर।। जब कोई साथ नहीं होता, तब साथ होता है यह ईश्वर। बुरे वक्त में भी संभल पाने का ज्ञान, हमें देता है ईश्वर।। अपने बच्चों के आंसू देख पिघलता है ईश्वर। मासूम ...

# प्रेरणादायी कविता : दुआओं का पन्ना

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कोई बच्चा अपनी मां से बहुत दूर चला जाए और उस पर कष्ट आ जाए तो जिस प्रकार मां की दुआएं उस बच्चे को सारे कष्टों  और बुरे सायों को दूर कर उसे आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है। उसी प्रकार इस कविता में किताब से उसका एक पन्ना अलग हो जाता है और विषम परिस्थितियों में भी जिंदा रहने की वजह  वह जिस किताब  से जुड़ा था उस किताब के द्वारा उसे दी गई दुआओं को मानता है ,और अपने शब्दों को यू अल्फाज देता है ... शायद मैं तुम्हारी ही दुआओं का पन्ना हूं । ना जाने कैसे फट गया; और तुमसे दूर होकर ,तुमसे ही कट गया।   तूफानों के बहाव में बहा और जहां तूफान ने छोड़ा वहीं सिमट गया।।  तेरे साथ था तो खिलखिलाता  था। पर वक्त के थपेड़ों से मैं अब कराहकर फड़फड़ाता था ।। जब तेरे पास था तो दुनिया की बुराई का एहसास ना डराता था । आज जब अलग हुआ तो, संघर्ष का घर्षण मुझे जलाता था।  था तो मैं आखिर पन्ना, खुद पर लगी आग कैसे बुझा पाता।  ऐसा संघर्ष पहली बार देखा था , परिस्थितियों से  तालमेल कैसे बिठा पाता ।  पर तू भी मेरी दुआओं से भरी किताब थी।  मुझे मेरे हाल पर कैसे छोड़ सकती ...

#प्रेरणादायी सुविचार: कोरोना वॉलिंटियर्स

  मैंने अपने मस्तिष्क में कोरोना विरोधी और  देश के लिए इस कठिन समय में काम कर रहे  वॉलिंटियर्स  (डॉक्टर्स , सिपाही पुलिस , सफाई वाला  , मेडिकल वाला  और  वह सब इंसान जो दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे हैं  वह सब वॉलिंटियर्स शब्द मैं समाहित है। ) से संबंधित आ रही लयबद्ध पंक्तियों को शब्दों में उतारने का कोशिश की है यदि आपको यह पंक्तियां पसंद आए तो इसको अपने नीचे कमेंट में बताइएगा और इसको और अधिक से अधिक शेयर कीजिएगा ।                        # शायरी :   दिमाग की बात दिल से  दुनिया में तुम बहुत हो, हम बहुत हैं ।                            लेकिन अलग और बेहतर वही , जिसमें इंसानियत बहुत है।। अपनी जान देकर के पल-पल देश को बचाया है ,             कोरोना तुझे मेरे देश के जवानों ने पल-पल हराया है  ।             तू नहीं टिकेगा यह तेरी भी समझ में ...

#प्रेरणादायी कविता : कर्म योग

 कविता में शब्दों के चमत्कृत प्रयोग द्वारा किसी व्यक्ति के उर्जा में बढ़ोतरी की जा सकती है।किसी मरणासन्न व्यक्ति में भी प्राण फुके जा सकते हैं।  भारत में कई महान कवि हुए हैं जिनकी कविता आज भी हमारे लिए प्रेरणा का विषय है मैंने भी अपनी स्वरचित कविता को कुछ प्रेरणादाई शब्द देने की कोशिश की है प्रयास किया है इस कविता का शीर्षक है कर्मयोग।                                 कर्म योग जिंदा रहने की जिद थी मेरी , तो मौत को भी मेरे आगे झुकना पड़ा।  पर इस जिद  में अड़े रहने के लिए,  मुझे बहुत कुछ खोना पड़ा ।। मेरे दुश्मन चारों ओर से घेरे खड़े थे , बाहर ही नहीं मेरे अंदर भी उनके किले गढे़ थे ।। पर मैंने भी हार न मानी , जंग जीतने की मैंने ठानी । आखिरकार जंग जीत रहा था मैं , भाग्य को कर्म से बदलना सीख रहा था मैं।।