#चांद पत्थर : देहरादून का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल
देहरादून - ऋषिकेश मार्ग के बीच में एक अत्यंत सुंदर गांव भोगपुर पड़ता है । चांद पत्थर जाने के लिए, भोगपुर से इठारना रोड के रास्ते पर सबसे पहला पड़ाव लाल बंगला आता है।
लाल बंगले से आगे की तरफ बढ़ने पर अंग्रेजों द्वारा बनाई गई नहर दिखाई पड़ती है और उस नहर के आग ही साथ साथ चलते रहने पर कुछ दूरी पर चांद पत्थर नामक जगह हमें मिलती है जहां चांद पत्थर के दर्शन होते हैं।
यदिआप उत्तराखंड के निवासी हो अथवा विदेशी हों औरआप उत्तराखंड भ्रमण करते हुए देहरादून में उपस्थित हैं तो आपको अवश्य ही चांद पत्थर को देखने आना चाहिए यह बहुत ही रोचक जगह है। यह देखना आपके लिए बहुत ही रोमांच भरा होगा।
इस जगह पर सेल्फी प्वाइंट भी निर्मित है जहां पर मुख्यत: पर्यटक बैठकर शांत वातावरण को महसूस करते हैं एवं अपनी तस्वीर खींचकर जगह की यादों को तस्वीर में कैद कर लेते हैं ।
यह देहरादून का रमणीय स्थल है किंतु लोगों में ज्यादा जानकारी ना होने पाने के कारण यह राष्ट्रीय स्तर अथवा विश्व स्तर पर पर इतनी ख्याति प्राप्त नहीं कर पाया है। किंतु ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा यहां नवनिर्माण और उत्थान कार्य विकासरत है और इस स्थान को भी उच्च स्तर पर प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बनाया जा सके इस प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं ।
https://youtu.be/RABR08A9QlE
चांद पत्थर एक मनोरम और रोचक स्थल है और इसकी कहानी और भी रोचक है।
बडे़ बुजुर्ग बताते हैं कि इस पत्थर पर चांद का निशान था ।इस पत्थर के नीचे बहुत सारी माया अथवा धन दबा हुआ था ।अंग्रेजों को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने इस पत्थर को हटाने का बहुत प्रयास किया पर जब असफल रहे तब उन्होंने पत्थर पर गोलियां बरसाना शुरू कर दिया।
पत्थर पर जहां गोलियां लगी वहां से खून निकला पर पत्थर जस का तस वही बना रहा ।पत्थर पर लगे गोलियों के निशान बुजुर्गों द्वारा कही गई बातों को सच साबित करते हैं ।
चांद पत्थर प्राकृतिक रूप से बना हुआ नायाब पत्थर है जिस पर लाल रंग की चांद की आकृति प्राकृतिक रूप से उभरी हुई है ।
यह पत्थर पहले की अपेक्षा जमीन में धंसता ही जा रहा है यहां सैलानी घूमने के लिए आते रहते हैं यहां अंग्रेजों द्वारा बनाई गई विशाल नहरें आज भी मजबूती से सिंचाई व्यवस्था का प्रमुख अंग बनी हुई है यहां का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है।
https://youtu.be/RABR08A9QlE
इस जगह से आगे बढ़ने पर थोड़ी ही दूरी पर मां ज्वाला देवी का मंदिर भी पड़ता है । इस मंदिर में ज्वाला माता के पदचिन्ह वाला प्राचीन पत्थर तथा प्राचीन शैली में निर्मित प्राचीन मूर्तियां भी मौजूद है ।श्रद्धालु यहां हर नवरात्र अथवा मनोकामना पूर्ति होने पर माता के दर्शनों हेतु आते हैं ।
गांव के लोग जो ज्वाला मां को अपनी कुलदेवी मानते थे और उत्तम रोजगार मिलने के बाद गांव से पलायन कर गए थे वे चाहे कहीं भी हो किंतु हर नवरात्र में अपनी परिवार सहित इन माता के मंदिर में अवश्य आते हैं ।यह आस्था का भी प्रतीक है ।
यदि आप कभी लाल बंगला व चांद पत्थर देखने आए तो मंदिर के दर्शन करने जा सकते हैं। यह स्थल अत्यंत रमणीय है, आपको यहां मन की शांति व प्रसन्नता प्राप्त होगी ।
यूट्यूब पर भोगपुर कि यह वीडियो देखने हेतु नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप भोगपुर के बारे में अन्य जानकारी एकत्रित कर सकते हैं ।
https://youtu.be/RABR08A9QlE
धन्यवाद।
स्वस्थ रहिए खुश रहिए।










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