# प्रेरणादायी कविता : दुआओं का पन्ना
कोई बच्चा अपनी मां से बहुत दूर चला जाए और उस पर कष्ट आ जाए तो जिस प्रकार मां की दुआएं उस बच्चे को सारे कष्टों और बुरे सायों को दूर कर उसे आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है।
उसी प्रकार इस कविता में किताब से उसका एक पन्ना अलग हो जाता है और विषम परिस्थितियों में भी जिंदा रहने की वजह वह जिस किताब से जुड़ा था उस किताब के द्वारा उसे दी गई दुआओं को मानता है ,और अपने शब्दों को यू अल्फाज देता है ...
शायद मैं तुम्हारी ही दुआओं का पन्ना हूं ।
ना जाने कैसे फट गया; और तुमसे दूर होकर ,तुमसे ही कट गया।
तूफानों के बहाव में बहा और जहां तूफान ने छोड़ा वहीं सिमट गया।।
तेरे साथ था तो खिलखिलाता था।
पर वक्त के थपेड़ों से मैं अब कराहकर फड़फड़ाता था ।।
जब तेरे पास था तो दुनिया की बुराई का एहसास ना डराता था ।
आज जब अलग हुआ तो, संघर्ष का घर्षण मुझे जलाता था।
था तो मैं आखिर पन्ना, खुद पर लगी आग कैसे बुझा पाता।
ऐसा संघर्ष पहली बार देखा था , परिस्थितियों से तालमेल कैसे बिठा पाता ।
पर तू भी मेरी दुआओं से भरी किताब थी।
मुझे मेरे हाल पर कैसे छोड़ सकती थी ।
मां थी तू मेरी मुझे, मरता कैसे देख सकती थी ।।
https://youtu.be/NmwyzaRBr-U
अब वह पन्ना किताब से सवाल करता है -
किंतु तूने सिर्फ मुझे पुनः नया रास्ता दिखाया।
मुझे मेरे संघर्षों से क्यों नहीं बचाया ???
दुआओं से भरी किताब बोली -
तेरे संघर्ष ने इतिहास का नया पन्ना लिखना था ।
और तुझे मेरे आंचल से छिटककर कुछ नवनिर्माण करना था।।
मैं तेरे प्रारब्ध को मिटा नहीं सकती थी ,
स्याही से सिंचित महान शब्दों से , तेरे अस्तित्व को अवगत करा नहीं सकती थी।
अपना कर्म तुझे खुद ही करना था, क्योंकि मेरे बहादुर पन्ने तुझे सदी की सबसे महान किताब जो बनना था।।
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स्वस्थ रहिए खुश रहिए
Bhut badiya... keep it up
जवाब देंहटाएंBilkul sahi, jindagi sangharh hai,
जवाब देंहटाएंAage badte rehna hoga👍👍